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Gita Wisdom

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 अर्जुन की आज्ञा का पालन – भक्त के संकेत पर भगवान

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 अर्जुन की आज्ञा का पालन – भक्त के संकेत पर भगवान श्लोक (Sanskrit): सञ्जय उवाच |  एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्॥ 24॥   शब्दार्थ (Shabdarth): सञ्जय उवाच – संजय ने कहा एवम् उक्तः – इस प्रकार कहे जाने पर हृषीकेशः – श्रीकृष्ण (इन्द्रियों के स्वामी) […]

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अर्जुन का रथ रोकने का अनुरोध – भगवद गीता श्लोक 1.21 का रहस्य

अर्जुन का रथ रोकने का अनुरोध – भगवद गीता श्लोक 1.21 का रहस्य श्लोक (Sanskrit) अर्जुन उवाच | सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥1.21॥   शब्दार्थ अर्जुन उवाच – अर्जुन ने कहा  सेनयोः उभयोः मध्ये – दोनों सेनाओं के मध्य  रथं स्थापय – मेरा रथ स्थापित कीजिए  मे अच्युत – हे अच्युत (कभी न गिरने वाले,

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Adhyay 1, Shlok 8 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 8 )

Adhyay 1, Shlok 8 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 8 )  श्लोक: 1.8 कर्णः च विकर्णः च अश्वत्थामा विकर्णः एव च। सौमदत्तिः च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः॥  शब्दार्थ:कर्णः — कर्णविकर्णः — विकर्ण (धृतराष्ट्र का पुत्र)अश्वत्थामा — द्रोणाचार्य का पुत्रसौमदत्तिः — भूरिश्रवा (सौमदत्त का पुत्र)बहवः शूराः — और भी बहुत से वीरमदर्थे त्यक्तजीविताः — मेरे लिए अपने प्राण

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