HARE KRISHNA

Krishna: The Ultimate Source of Infinite Bliss and Inner Peace

Discover the Path of Devotion (Bhakti) to Find Everlasting Happiness

In today’s fast-paced world, everyone is searching for one thing: True Happiness. We see the whole world running—restlessly chasing money, complex relationships, and material success. But can these temporary gains ever satisfy the soul?

The ancient wisdom of the Bhakti Path teaches us that complete, eternal, and unchanging bliss cannot be found in the outside world. It exists only in Lord Krishna—the divine source who fills the heart with love and completes the soul.

He is the joy that gods, sages, and seekers have spent lifetimes searching for. Whether you are starting your spiritual journey or looking for deeper connection, find your way back to the source of all bliss.

शाश्वत सुख की खोज: भक्ति के मार्ग पर चलें

आज की इस भागदौड़ भरी दुनिया में, हर कोई सिर्फ एक ही चीज़ की तलाश में है: सच्ची खुशी। हम देखते हैं कि पूरी दुनिया—पैसों, जटिल रिश्तों और भौतिक सफलता के पीछे बेचैनी से भाग रही है। लेकिन क्या ये अस्थायी उपलब्धियां कभी हमारी आत्मा को संतुष्ट कर सकती हैं?

भक्ति मार्ग का प्राचीन ज्ञान हमें सिखाता है कि पूर्ण, शाश्वत और कभी न बदलने वाला आनंद बाहरी दुनिया में नहीं मिल सकता। यह केवल भगवान श्री कृष्ण में वास करता है—वह दिव्य स्रोत जो हृदय को प्रेम से भर देता है और आत्मा को पूर्णता प्रदान करता है।

वे वह आनंद हैं जिसे खोजने के लिए देवताओं, ऋषियों और साधकों ने अपना पूरा जीवन बिता दिया। चाहे आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा अभी शुरू कर रहे हों या परमात्मा से गहरे जुड़ाव की तलाश में हों, आइए उस ‘परम आनंद’ के स्रोत की ओर वापस चलें।

श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 5

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा – भाग 5 “प्रेम में ही मोक्ष है, सेवा में ही जीवन है” उस दिव्य आत्मा की अंतिम विदाई एक दिन, जब रात्रि को कीर्तन समाप्त हुआ और सभी भक्त विश्राम में चले गए, वो भक्त—जिसने राधा-कृष्ण को अपने माता-पिता

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 4

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा भाग 4 जहाँ प्रेम सेवा बनता है और सेवा मिलन की ओर ले जाती है   पिछले भाग से आगे… उस दिव्य बालक की आत्मा, जो अब वयस्क बन चुकी थी, वृन्दावन में सब कुछ त्यागकर आ बसी थी पर

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 3

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा – भाग 3 सेवा, समर्पण और आत्म-लय का अंतिम चरण   पिछले भागों से… उस दिव्य बालक की आत्मा, जिसने राधाकृष्ण को अपने माता-पिता माना था, पिछले जन्म की अधूरी पुकार को लेकर इस जन्म में पुनः जन्मी थी। अपने

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 2

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस बालक की पुनर्जन्म गाथा – भाग 2 एक अनाथ बच्चे का दिव्य संबंध, जो साक्षात् राधाकृष्ण को माँ-पिता के रूप में जानता है   पिछले भाग से आगे… जिस बालक ने पिछले जन्म में राधाकृष्ण को माता-पिता के रूप में पाने की अधूरी इच्छा

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 1

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस बालक की पुनर्जन्म गाथा – भाग 1 एक आत्मा की पुकार और प्रभु की करुणा पर आधारित कहानी प्रारंभ – अधूरी पुकारबहुत समय पहले की बात है। एक युवक था उसका मन संसार में था, लेकिन आत्मा श्रीकृष्ण और राधारानी की भक्ति में डूबा

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Why Chant the Hare Krishna Mahamantra and What Are Its Benefits?

Why Chant the Hare Krishna Mahamantra and What Are Its Benefits ? Introduction:Among the infinite paths of Sanatan Dharma, “Naam Jap” (chanting the holy names) is considered the most simple, pure, and powerful practice. In this age of Kali (Kaliyuga), the essence of devotion lies in the remembrance of the

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