“मैं आई तेरे आँगन में…” (कविता)
मैं आई तेरे आँगन में, कविता मैं आई तेरे आँगन में, आम बेचन श्याम,न भाव था व्यापार का, बस दरस की थी प्यास।घूँघट में छुपा चेहरा, मन में थी लाज,पर नजरें ढूंढती थीं बस, तेरी मधुर आवाज।तू खेल रहा था बालकों संग, मुरली ताने हाथ,मैं थर-थर काँप रही थी, मन कहे – आज तो बात।तू […]