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Gita Wisdom

Adhyay 1, Shlok 15 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 15 ) “धर्म की घोषणा अब तेज़ होती है – पाँचों पांडवों का शंखनाद”

श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीम का शंखनाद – गीता श्लोक 1.15 का गूढ़ अर्थ   श्लोक 1.15॥पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः॥  शब्दार्थहृषीकेशः – भगवान श्रीकृष्णपाञ्चजन्यं – श्रीकृष्ण का शंखधनंजयः – अर्जुन (जो सम्पत्ति जीतने वाला है)देवदत्तं – अर्जुन का शंखभीमकर्मा वृकोदरः – भीम (बलशाली कार्यों वाला, वृहद उदर वाला)पौण्ड्रं महाशङ्खं – भीम का […]

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Adhyay 1, Shlok 14 – कृष्ण-अर्जुन का शंखनाद: धर्म की ओर पहला कदम

Adhyay 1, Shlok 14 – कृष्ण-अर्जुन का शंखनाद: धर्म की ओर पहला कदम   श्लोक : 1.14 ततः श्वेतैः हयैः युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ | माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥  शब्दार्थततः — इसके बादश्वेतैः हयैः युक्ते — श्वेत अश्वों से जुते हुएमहति स्यन्दने स्थितौ — महान रथ में स्थितमाधवः — श्रीकृष्ण (माधव)पाण्डवः च एव — और

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Adhyay 1, Shlok 13 – जब युद्धभूमि गूंज उठी: हर योद्धा ने शंख बजाया

Adhyay 1, Shlok 13 – जब युद्धभूमि गूंज उठी: हर योद्धा ने शंख बजाया   श्लोक : 1.13 ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः |सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्॥  शब्दार्थततः – इसके बादशङ्खाः च – शंखभेर्यः च – भेरी (ढोल जैसे वाद्य)पणवानक गोमुखाः – अन्य युद्ध वाद्य जैसे मृदंग और तुरहीसहसा एव – एकसाथ हीअभ्यहन्यन्त – बजाए गएसः शब्दः –

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भगवद गीता 1.12 – जब भीष्म ने शंखनाद किया और युद्ध की ज्वाला भड़क उठी

भगवद गीता 1.12 – जब भीष्म ने शंखनाद किया और युद्ध की ज्वाला भड़क उठी   श्लोक: 1.12 तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः।सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्॥ शब्दार्थ:तस्य — उसका (दुर्योधन का)सञ्जनयन् हर्षम् — उत्साह उत्पन्न करते हुएकुरु वृद्धः — कुरु वंश के वृद्ध (भीष्म पितामह)पितामहः — पितामहसिंहनादं — सिंह के समान गर्जनाविनद्य — गर्जना करते हुएउच्चैः

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भगवद गीता 1.11 – दुर्योधन का आह्वान | कौरवों की एकता बनाम धर्म की परीक्षा

भगवद गीता 1.11 – दुर्योधन का आह्वान | कौरवों की एकता बनाम धर्म की परीक्षा   श्लोक: 1.11 अयनेषु च सर्वेषु यथाभागम् अवस्थिताः।भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि॥ शब्दार्थ:अयनेषु — मोर्चों परच सर्वेषु — और सभी स्थानों परयथाभागम् अवस्थिताः — अपने-अपने स्थानों पर स्थित हुएभीष्मम् एव — केवल भीष्म की हीअभिरक्षन्तु — रक्षा करेंभवन्तः सर्वे एव हि

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Adhyay 1, Shlok 10 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 10 )

Adhyay 1, Shlok 10 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 10 )   श्लोक: 1.10 अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्।पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्॥ शब्दार्थ:अपर्याप्तम् — अपर्याप्त (अपर्याप्त यहाँ विडंबनात्मक रूप से कहा गया है)तत् अस्माकं बलम् — हमारी सेना की शक्तिभीष्म अभिरक्षितम् — भीष्म द्वारा रक्षितपर्याप्तम् — पर्याप्ततत् इदं एतेषां बलम् — पांडवों की सेना की शक्तिभीम अभिरक्षितम्

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Adhyay 1, Shlok 9 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 9 )

Adhyay 1, Shlok 9 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 9 )   श्लोक: 1.9 अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः। नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः॥  शब्दार्थ:अन्ये च — और भीबहवः शूराः — बहुत से वीरमदर्थे — मेरे लिएत्यक्तजीविताः — जीवन त्यागने को तत्परनानाशस्त्रप्रहरणाः — अनेक प्रकार के शस्त्रों से युक्तसर्वे युद्धविशारदाः — सभी युद्ध में कुशल भावार्थ:दुर्योधन कहता है

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Adhyay 1, Shlok 8 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 8 )

Adhyay 1, Shlok 8 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 8 )  श्लोक: 1.8 कर्णः च विकर्णः च अश्वत्थामा विकर्णः एव च। सौमदत्तिः च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः॥  शब्दार्थ:कर्णः — कर्णविकर्णः — विकर्ण (धृतराष्ट्र का पुत्र)अश्वत्थामा — द्रोणाचार्य का पुत्रसौमदत्तिः — भूरिश्रवा (सौमदत्त का पुत्र)बहवः शूराः — और भी बहुत से वीरमदर्थे त्यक्तजीविताः — मेरे लिए अपने प्राण

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Adhyay 1, Shlok 7 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 7 )

Adhyay 1, Shlok 7 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 7 )   श्लोक 1.7 अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम। नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते॥ शब्दार्थ (Word Meaning):अस्माकं तु – हमारी ओर से तोविशिष्टाः ये – जो विशेष (प्रमुख) हैंतान् निबोध – उन्हें जानोद्विजोत्तम – हे ब्राह्मणश्रेष्ठ (संजय)नायकाः मम सैन्यस्य – मेरी सेना के नायकसंज्ञार्थम् –

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Adhyay 1, Shlok 6 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 6 )

Adhyay 1, Shlok 6 (भगवद गीता अध्याय 1 श्लोक 6 )   श्लोक 1.6 युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्। सौभद्रः द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः॥ शब्दार्थ:युधामन्युश्च – युधामन्यु भीविक्रान्तः – अत्यंत पराक्रमीउत्तमौजाः च – और उत्तमौजावीर्यवान् – बलशालीसौभद्रः – सुभद्रा का पुत्र (अभिमन्यु)द्रौपदेयाः च – द्रौपदी के पुत्रसर्वे एव महारथाः – ये सभी महान योद्धा हैं भावार्थ (Meaning):दुर्योधन कहता

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