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Gita Wisdom

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 26, अर्जुन की दृष्टि – अपनों को शत्रु रूप में देखना

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 26, अर्जुन की दृष्टि – अपनों को शत्रु रूप में देखना   श्लोक: तत्रापश्यत्स्थितान् पार्थः पितॄन् अथ पितामहान् |  आचार्यान् मातुलान् भ्रातॄन् पुत्रान् पौत्रान् सखींस्तथा ||  श्वशुरान् सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि॥ 26॥   शब्दार्थ (Shabdarth): तत्र अपश्यत् – वहाँ देखा स्थितान् पार्थः – खड़े हुए अर्जुन ने पितॄन् – अपने पिताओं […]

Bhajan

Maiya Mori Main Nahin Makhan Khayo

Maiya Mori Main Nahin Makhan Khayo Song by Hemlata and Ravindra Jain ‧ 2007 Lyrics O, maiyaa moree Maiyaa O, maiyaa Maiyaa, moree maiyaa O, ri maiyaa Bhori maiyaa Sanchi kah rahyo tero kanhaiya O, maiyaa moree, main nahin maakhan khaayo Nahin-nahin, main nahin maakhan khaayo Main nahin maakhan khaayo Maiyaa moree, main nahin maakhan

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भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 25, धर्म युद्ध के पहले दर्शन – अर्जुन की दृष्टि से

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 25, धर्म युद्ध के पहले दर्शन – अर्जुन की दृष्टि से संस्कृत श्लोक: भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् | उवाच पार्थः पश्यैतान् समवेतान् कुरूनिति ॥ 25॥   शब्दार्थ (Shabdarth): भीष्म-द्रोण-प्रमुखतः – भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने सर्वेषां च महीक्षिताम् – और अन्य सभी राजाओं के सामने उवाच – कहा पार्थः

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भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 अर्जुन की आज्ञा का पालन – भक्त के संकेत पर भगवान

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 24 अर्जुन की आज्ञा का पालन – भक्त के संकेत पर भगवान श्लोक (Sanskrit): सञ्जय उवाच |  एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत | सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्॥ 24॥   शब्दार्थ (Shabdarth): सञ्जय उवाच – संजय ने कहा एवम् उक्तः – इस प्रकार कहे जाने पर हृषीकेशः – श्रीकृष्ण (इन्द्रियों के स्वामी)

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भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 23

भगवद गीता – अध्याय 1, श्लोक 23, परखना है कौन खड़ा है अधर्म के साथ श्लोक : योत्स्यमानानविक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः।  धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेः युध्दे प्रियचिकीर्षवः॥ 23॥   शब्दार्थ (Shabdarth): योत्स्यमानान अविक्षे अहम्: – मैं देखना चाहता हूँ इन युद्ध करने वालों को य एते अत्र समागताः – जो यहाँ एकत्र हुए हैं धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेः –

Poetry

श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 5

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा – भाग 5 “प्रेम में ही मोक्ष है, सेवा में ही जीवन है” उस दिव्य आत्मा की अंतिम विदाई एक दिन, जब रात्रि को कीर्तन समाप्त हुआ और सभी भक्त विश्राम में चले गए, वो भक्त—जिसने राधा-कृष्ण को अपने माता-पिता के रूप में स्वीकारा था—

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 4

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा भाग 4 जहाँ प्रेम सेवा बनता है और सेवा मिलन की ओर ले जाती है   पिछले भाग से आगे… उस दिव्य बालक की आत्मा, जो अब वयस्क बन चुकी थी, वृन्दावन में सब कुछ त्यागकर आ बसी थी पर अब उसका त्याग केवल वैराग्य

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 3

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस आत्मा की पुनर्जन्म गाथा – भाग 3 सेवा, समर्पण और आत्म-लय का अंतिम चरण   पिछले भागों से… उस दिव्य बालक की आत्मा, जिसने राधाकृष्ण को अपने माता-पिता माना था, पिछले जन्म की अधूरी पुकार को लेकर इस जन्म में पुनः जन्मी थी। अपने सांसारिक माता-पिता की सेवा को

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 2

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस बालक की पुनर्जन्म गाथा – भाग 2 एक अनाथ बच्चे का दिव्य संबंध, जो साक्षात् राधाकृष्ण को माँ-पिता के रूप में जानता है   पिछले भाग से आगे… जिस बालक ने पिछले जन्म में राधाकृष्ण को माता-पिता के रूप में पाने की अधूरी इच्छा लेकर देह त्याग दिया था,

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श्रीराधाकृष्ण की अधूरी भक्ति और पुनर्जन्म की कथा भाग 1

माँ राधा, पिताश्री कृष्ण – उस बालक की पुनर्जन्म गाथा – भाग 1 एक आत्मा की पुकार और प्रभु की करुणा पर आधारित कहानी प्रारंभ – अधूरी पुकारबहुत समय पहले की बात है। एक युवक था उसका मन संसार में था, लेकिन आत्मा श्रीकृष्ण और राधारानी की भक्ति में डूबा हुआ था। वो रोज़ उनकी