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BhaktiPath – एक कदम कृष्ण की ओर
श्री चैतन्य महाप्रभु (गौरंग महाप्रभु)
श्री चैतन्य महाप्रभु को साक्षात राधा-कृष्ण का सम्मिलित अवतार माना जाता है। उन्होंने ही ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र को जन-जन तक पहुँचाया।
- जन्म: 18 फरवरी, 1486 (फाल्गुन पूर्णिमा के दिन)। Chaitanya Mahaprabhu Biography के अनुसार उनका जन्म चंद्र ग्रहण के समय हुआ था।
- स्थान: श्रीधाम मायापुर, नदिया जिला, पश्चिम बंगाल।
- माता-पिता: उनकी माता का नाम शची देवी और पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र था।
- भक्ति का स्वरूप: उनकी भक्ति ‘प्रेम-भक्ति’ और ‘विप्रलम्भ भाव’ (विरह की भक्ति) थी। उन्होंने सिखाया कि भगवान को केवल प्रेम और कीर्तन (संकीर्तन) के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने ‘शिक्षाष्टकम’ के माध्यम से भक्ति के आठ सूत्र दिए।
श्री नित्यानंद प्रभु (निताई)
श्री नित्यानंद प्रभु को भगवान बलराम का अवतार माना जाता है। वे महाप्रभु के सबसे निकटतम सहयोगी और गुरु-तत्व के प्रतीक हैं।
- जन्म: माना जाता है कि उनका जन्म 1474 ईस्वी के आसपास हुआ था (महाप्रभु से लगभग 12 वर्ष बड़े)।
- स्थान: एकचक्र ग्राम, वीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल।
- माता-पिता: उनकी माता का नाम पद्मावती और पिता का नाम हाड़ाई पंडित था।
- भक्ति का स्वरूप: नित्यानंद प्रभु की भक्ति ‘परम दयालु’ भाव की थी। उन्होंने समाज के सबसे गिरे हुए लोगों (जैसे जगाई-मधाही) को भी अपनी करुणा से कृष्ण भक्त बना दिया। उनकी कृपा के बिना महाप्रभु की भक्ति प्राप्त करना असंभव माना जाता है।
परिचय (Introduction):
“यह ब्लॉग आध्यात्मिक पूर्णता का स्थान नहीं है — बल्कि यह उन सच्चे साधकों के लिए एक पवित्र स्थान है जो भक्ति के मार्ग पर एक-एक कदम बढ़ाना सीख रहे हैं।”
हमारी कहानी (Our Story):
“BhaktiPath का जन्म एक ऐसे भक्त से हुआ है जो जीवन में कई बार गिरा, लेकिन कृष्ण का हाथ कभी नहीं छोड़ सका। यह पांडित्य प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि साथ मिलकर चलने का एक विनम्र प्रयास है।”
आपको यहाँ क्या मिलेगा? (What you will find here):
- भगवद गीता का सार: जीवन बदलने वाले सरल श्लोक।
- संतों का जीवन: महान आचार्यों की प्रेरणादायक कथाएँ।
- दैनिक प्रेरणा: जब आप खुद को अकेला या ईश्वर से दूर महसूस करें।
- माया से संघर्ष: कठिन समय में भी कृष्ण को याद रखने के सरल उपाय।
हमारी प्रेरणा (Our Inspiration)
BhaktiPath का जन्म किसी व्यवसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत पुकार से हुआ है। जीवन के उतार-चढ़ाव और संघर्षों के बीच जब भी हम गिरते हैं, तो केवल ‘गोविंद’ का हाथ ही हमें थामता है। यह ब्लॉग उन सभी लोगों के लिए है जो खुद को अकेला पाते हैं, लेकिन जिनके भीतर का विश्वास उन्हें हारने नहीं देता। हम यहाँ पंडित बनकर नहीं, बल्कि एक सह-यात्री (Co-traveler) बनकर साथ चलने आए हैं।
निष्कर्ष (Closing)
“यदि आपका मन बार-बार भटकता है, यदि आपकी आँखें संसार की भीड़ में भी उस परम सत्य को खोजती हैं, तो आप सही स्थान पर हैं। आइए, हम सब मिलकर प्रेम, शरणागति और भक्ति के इस दीप को प्रज्वलित करें। यह रास्ता कठिन हो सकता है, पर कृष्ण साथ हैं तो हर कदम आनंदमय है।”
हरे कृष्ण!